यदि हम अपने से पूछें कि हिन्दी में प्रेमचन्द के बाद कौन से उपन्यास श्रेष्ठ मानते हैं, जिन्हें हम साहित्य के इतिहास में सर्वोच्च स्थान दे सकते हैं, तो मेरे मत से, इन्हीं सात उपन्यासों, (सूरज का सातवाँ घोड़ा, धर्मवीर भारती; मैला आँचल, फणीश्वर नाथ रेणु; आधा गाँव, मासूम रजा राही; राग दरबारी, श्रीलाल शुक्ल; इदन्नमम, मैत्रेयि पुष्पा; हमारा शहर उस बरस, गीतांजलि श्री; और कलिकथा वाया बाईपास, अलका सारावगी) की बात की जा सकती है। मतभेद हो सकता है क्यों कि इन के अतिरिक्त भी हिन्दी में ऐसे उपन्यास हैं जो श्रेष्ठ हैं, जैसे कि भगवतीचरण वर्मा की रचना चित्रलेखा, जैनेन्द्र जी का त्यागपत्र, इत्यादि। परन्तु यहाँ पर उन उपन्यासों की चर्चा उद्दीष्ट है जो आजा़दी के बाद लिखे गये हैं। रेणु के मैला आँचल पर दो मत नहीं हो सकते। मैं तो इसे हिन्दी का सर्वश्रेष्ठ उपन्य़ास मानता हूँ। प्रयोग की दृष्टि से भी यह सर्वाधिक सफल और प्रभावी रचना है।