इस समस्त सामग्री के संकलनकर्ता और अवधी लोक साहित्य के मर्मज्ञ डा. इन्दु प्रकाश पाण्डेय ने प्रथम खण्ड में अवधी लोकगीतों को रखा है, जो अवधी समाज के घरों में विविध संस्कारों के अवसरों पर गाये जाते हैं। ये प्रायः औरतों द्वारा गाये जाते हैं। ग्रन्थावली के द्वितीय खण्ड में अवधी लोक कथाओं को रखा गया है, जिन्हें बालक अपनी दादी-नानी ओर माताओं से रात को सोने के पहले सुनते रहे हैं। इस में व्रत कथाएँ भी हैं, जिन्हें तीज-त्योहारों में और धार्मिक अवसरों पर बहुएं अपनी सासों तथा वरिष्ठ महिलाओं से सुनती हैं। ग्रन्थावली के तृतीय खण्ड में अवधी-हिन्दी कहावतों का कोश, कोश-विज्ञान की प्रविधि के अनुसार दिया गया है। कहावत कोश से पहले विद्वान लेखक ने कहावतों का विवेचन समाज-शास्त्रीय दृष्टि से प्रस्तुत किया है।... इस खण्ड के अन्तिम भाग में लोक साहित्य विमर्श सम्बन्धी महत्वपूर्ण लेख रखे गये हैं। इन से लोक साहित्य में शोध करनेवालों को नई दृष्टि मिलेगी।