• अवधी लोक-गीत और परम्परा, रामनारायण लाल बेनीप्रसाद, इलाहाबाद 1957 (दूसरा संस्करण 1958 में)। इस पुस्तक में उत्तर भारत के अवधी क्षेत्र के संस्कारों पर गाये जानेवाले लगभग 200 गीत हैं. ये गीत मुण्डन, छेदन, जनेऊ, विवाह जैसे महत्वपू्र्ण संस्कारों पर महिलाओं द्वारा गाये जाते हैं। ये गीत ठेठ अवधी में प्रस्तुत किये गये हैं और इन के रूपान्तर मानक हिन्दी (खडी़ बोली) में भी दिये गये हैं। आरम्भ में 85 पृष्ठों की भूमिका भी दी गयी है।

  • हिन्दी रचना-बोध, किताब महल, बम्बई 1957। यह पुस्तक हिन्दी भाषा का संक्षिप्त व्याकरण है, जिस में हिन्दी सीखने के लिए कुछ अभ्यास भी दिये गये हैं।

  • अवध की लोक-कथाएं, शिव प्रकाशन, बम्बई 1959। इस पुस्तक में बच्चों की 32 लोक-कथाएं शामिल की गयी हैं।

  • खून का व्यापारी आचार्य शुक्ल साधना सदन, कानपुर 1962। यह पुस्तक कहानियों का संकलन है, जिस में एक कहानी „खून का व्यापारी“ है।
  • साहित्य-समिधा, रामनारायण लाल बेनीप्रसाद, इलाहाबाद 1963. इस पुस्तक में अनेक विषयों पर लिखे गये निबन्ध संकलित किये गये हैं।

  • मँझधार की बाहें,  क्षितिज प्रकाशन, बम्बई, 1966। इस पुस्तक के प्रकाशन द्वारा काव्य-लेखन के क्षेत्र में पदार्पण किया।

  • अवधी व्रत कथाएं, भारतीय ज्ञानपीठ, वाराणसी, 1967। इस पुस्तक में ऐसी 100 लोक कथाएं रखी गयी हैं, जिन को औरतें तीज-त्योहारों पर पूजा के बाद सुनती-सुनाती हैं।

  • Curs de Limba Hindi, The University of Bucharest 1967। यह पुस्तक रूमेनियन भाषी विद्यार्थियों के लिए तैयार की थी। यह रूमेनियन भाषा में है। उस समय लेखक 2 साल के लिए कल्चरल प्रौफे़सर के रूप में भारत सरकार की ओर से भेजा गया था।

  • Regionalism in Hindi Novels,  Franz Steiner Verlag, Wiesbaden 1974। यह मेरा शोध ग्रन्थ है, जिस पर मुझे डी.लिट. की उपाधि Utrecht University,  Holland से मिली थी।

  • Hindi Literature - Trends and Traits, Firma K.L.Mukhopadhyay, Calcutta 1975। इस पुस्तक में हिन्दी साहित्य का सम्पूर्ण इतिहास 12 अध्यायों में प्रस्तुत किया गया है। ये मेरे 12 व्याख्यान हैं, जिन्हें उपसला विश्वविद्यालय के लिए तैयार किया गया था।.

  • अवधी कहावतें , रचना प्रकाशन, इलाहाबाद 1977। इस ग्रन्थ में 650 अवधी कहावतें व्याख्या सहित प्रस्तुत की गयी हैं.

  • हिन्दी के आँचलिक उपन्यसों में जीवनसत्य , नैशनल पब्लिशिंग हाउस, नई दिल्ली 1979। इस में हिन्दी के आंचलिक उपन्यसों का विस्तृत एवं वैज्ञानिक अध्ययन प्रस्तुत किया गया है.

  • Romantic Feminism in Hindi Novels Written by Women,  House of Letters, New Delhi 1988। इस पुस्तक में 1970 के बाद लिखनेवाली लेखिकाओं के उपन्यसों की व्याख्या की गयी है। प्रमुख प्लौट मोटिव प्रेम और रोमांस होने के कारण इन के नारी-स्वातंत्र्य की लडा़ई को रोमांटिक कहा गया है.

  • अवधी-हिन्दी कहावत कोश, हिन्दी बुक सैंटर, नई दिल्ली 1991।

  • उपन्यास -विधा और विधान, इन्द्रप्रस्थ प्रकाशन, दिल्ली 1995। इस ग्रन्थ में उपन्यस विधा का सैद्धान्तिक विवेचन प्रस्तुत किया गया है और साथ ही कतिपय नारी उपन्यासों की मीमांशा की गयी है.

  • यादों के उजाले , कवि सभा, नई दिल्ली 2001। यह उर्दू की शेरो-शायरी का संकलन है, जिसे देवनागरी एवं फा़रसी दोनों लिपियों में छापा गया है. कुछ कठिन शब्दों के अर्थ भी दिये गये हैं.

  • हिन्दी के अधुनातन नारी उपन्यास , हिन्दी बुक सैंटर, नई दिल्ली 2004। इस में 1985 से 2001 तक की 19 लेखिकाओं के तेईस उपन्यासों की विस्तृत व्याख्या प्रस्तुत की गयी है। इस अध्ययन से पता लगता है कि नारी-लेखन रोमांटिक प्रवत्ति से उठ कर अनेक अन्य प्रकार के विमर्शों एवं समस्याओं तक पहुँच गया है. नारी-लेखन में परिपक्वता के दर्शन होने लगे हैं.

  • पानी पर बुनियाद, अनुभव प्रकाशन, नई दिल्ली 2006। यह लेखक का दूसरा कविता संग्रह है, जो लगभग 40 साल बाद प्रस्तुत हुआ है। (उदाहरण हिंदी में)

  • हिन्दी के प्रयोगधर्मी उपन्यास, हिन्दी बुक सैंटर, नई दिल्ली 2008। इस आलोचनात्मक पुस्तक में हिन्दी के 7 श्रेष्ठ प्रयोगधर्मी उपन्यसों की वैज्ञानिक व्याख्या प्रस्तुत की गयी है. (उदाहरण हिंदी में)

  • अवधी लोक साहित्य ग्रंथावली, जनवाणी प्रकाशन, दिल्ली 2010। तीन खण्डों में लेखक के लोक साहित्य सम्बन्धी समग्र लेखन को ग्रंथावली के रूप में प्रकाशित किया गया है। इस में कुल मिला कर, तीनों खण्डों में, लगभग 1000 पृष्ठ हैं। इस संग्रह में लोकगीत, बच्चों की कथाएँ, व्रत-कथाएँ, कहावतेँ तथा लेखक के लोक-साहित्य संबंधी विषयों पर अनेक आलेख हैं. प्रथम खण्ड में संस्कार गीत हैं, जिन्हें औरतें जीवन के महत्वपू्र्ण अवसरों पर गाती हैं। बच्चों की कथाएँ, जो दूसरे खण्ड में हैं, वे केवल अवधी क्षेत्र में ही नहीं, बल्कि भारत के अन्य भागों में भी विविध रूपों में प्रचलित हैं। दूसरे खण्ड की ये बाल कथाएँ तथा व्रत कथाएँ आज भी अवधी क्षेत्र में औरतों द्वारा पीढी़-दर-पीढी़ कही-सुनी जाती हैं। इन व्रत-कथाओं से चुन कर 35 कथाओं का अनुवाद पाण्डेय जी ने अपनी पत्नी हाइडेमरी के साथ मिल कर जर्मन भाषा में किया है। इस ग्रन्थावली के तीसरे खण्ड में 563 कहावतें कोश के रूप में प्रस्तुत की गयीं हैं और साथ में उन के अर्थ भी दिये गये हैं। इसी खण्ड में श्री पाण्डेय ने लोकवार्ता संबंधी अपने विद्वतापूर्ण अनेक आलेखों का संकलन भी प्रस्तुत किया है। (उदाहरण हिंदी में)

खुद की तथा उन पर दूसरों की लिखी हुई रचना

  • पुनि जहाज पै आवै, आयास प्रकाशन, हरिद्वार 1999 । इस ग्रन्थ को लेखक की 75वीं सालगिरह पर डा. कमल कांत बुधकर ने सम्पादित एवं समर्पित किया। इस में लेखक की वहुत-सी गद्य-पद्य रचनाएं हैं, साथ ही अनेक अन्य विद्वानों की जर्मन, अंग्रेजी़ रचनाएं भी हिन्दी में अनूदित हैं। लेखक पर यह एक महत्वपूर्ण ग्रन्थ है।