• Zwei Kulturen – eine Familie. Das Beispiel deutsch-indischer Eltern und ihrer Kinder, Verlag für Interkulturelle Kommunikation, Frankfurt 1988. दो संस्कृतियाँ एक परिवार: जर्मन-भारती माँ-बाप तथा उन के बच्चे। इस अध्यायन में आनुभाविक भाग पर विशेष बल दिया गया है, जिस में दस भारती-जर्मन परिवारों के साथ हुए उन्मुक्त साक्षात्कारों के परिणामों की व्याख्या की गयी है। इन परिणामों से, अन्य बातों के अलावा, यह प्रतीत होता है कि इन परिवारों ने सांस्कृतिक अन्तरों को अपने-अपने ढंगों से निबटने के उपा विकसित कर लिये हैं।

  • „…und ich bin bunt !“:  Bi-kulturelle Erziehung in der Familie, Hrsg. und Verlag: Verband binationaler Familien und Partnerschaften iaf e.V. (www.verband-binationaler.de), Frankfurt a. M. 1990. ...और मैं रंगीन हूँ !“ परिवार में द्वि-सांस्कृतिक शिक्षण –यह पुस्तक माँ-बापों को उन मामलों में सलाह देने के लिए है जो उन के अलग होने पर उत्पन्न हो सकते हैं। विभिन्न देशों या संस्कृतियों के होने के कारण ऐसे सवाल पैदा हो सकते हैं, जिन का सम्बन्ध द्वि-भाषिक या विभिन्न धर्मावलम्बी या अलग-अलग नस्लों के होने के कारण हो सकता है। पारिवारिक भूमिकाओं के मामले में भी ये समस्याएँ उत्पन्न हो सकती हैं, जिन्हें यहाँ सुलझाने की कोशिश की गयी है। (उदाहरण जर्मन में)

  • Wenn Schulen sich öffnen: Ein Handbuch für die interkulturelle Praxis, Hrsg. Amt für multikulturelle Angelegenheiten und Schuldezernat der Stadt Frankfurt am Main, dipa-Verlag, Frankfurt a. M. 1996. जब स्कूल खुलेंगे : अन्तरसांस्कृतिक आचार-संहिता –  इस पुस्तिका का पहला खण्ड अन्तरसांस्कृतिक शिक्षण के विभिन्न पहलुओं को पूरा करता है, उदाहरण के लिए, अन्य संस्कृतियों से परिचय प्राप्त करना, माँ-बाप के काम, स्त्री-पुरुषों की भूमिकाएँ, अनेक भाषाओं की समस्याएँ, अनेक धर्मों के साथ रहना, विदेशियों के प्रति शत्रुभाव, हिंसा एवं अपराध इत्यादि समस्याओं को, परियोजनाओं के नमूनों के साथ प्रत्येक अध्याय में समझाया गया है और साथ ही सम्भावित सहयोगी के साथ संक्षिप्त बातचितें भी दी गयी हैं। दूसरे महत्वपूर्ण किन्तु संक्षिप्त खण्ड में आचार संहिता के अनुसार उन समस्याओं पर विचार कियी गया है. जिन का सम्बन्ध स्कूल संगठन, संविदागत व्यवस्था तथा बीमा सम्बन्धी प्रश्नों से है । (उदाहरण जर्मन में)

  • Das Betasten des Elefanten: Länderinformationen für deutsch-indische Paare, Hrsg. Verband binationaler Familien und Partnerschaften iaf e.V. (www.verband-binationaler.de), Frankfurt a. M. 1998. हस्ति-स्पर्श-ग्यान (हाथी को छूना) – इस सूचनात्मक पुस्तिका में भारत-जर्मन परिवारों सम्बन्धी प्रश्नों पर जानकारियाँ दी गयी हैं। उन की कानूनी स्थिति, साथ ही भारतीय संस्कृति के बारे में भी कुछ सूचनाएँ दी गयी हैं। उदाहरण के लिए परिवार की भूमिका तथा भारत में नारी की स्थिति। ऐसे सवालों को भी उठाया गया है. जो भारत में पर्यटकों से प्रायः पूछे जाते हैं। अन्त में भारत में बसने तथा वहाँ की कानूनी समस्याओं को भी पेश किया गया है। (उदाहरण जर्मन में)